4 मार्च, विश्व मोटापा उन्मूलन दिवस –
मोटापा दुर्लभ बीमारियों के प्रादुर्भाव में अग्रणी बन गया
डॉ बी. आर. नलवाया
अच्छी सेहत और लम्बी उम्र की चाहत मनुष्य मात्र में अतीत से बनी हुई। स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता व स्वस्थ रहने के लिए चिकित्सीय व प्राकृतिक नियमों का पालन करना भी आवश्यक है। आज देश में मोटापे की समस्या बढ़ती जा रही है। लैंसेट की नई शोध में भारत की शहरी आबादी का 70 प्रतिशत हिस्सा मोटापा या अधिक वजन की श्रेणी में आ गया है। हालाकि अब भारतीय व्यक्तियों में अपनी सेहत को लेकर चिंता बनी हुई। फिर भी मोटापे से छुटकारा पाने के लिए लोग डाइटिंग करना शुरू कर देते हैं, लेकिन इससे अन्य बीमारियों पनपने लग जाती है। मोटापा कम करने या वजन घटाने के कई तरीके एक्सपटर्स-“डॉक्टर” के साथ योग गुरुओं” से सीखे जाते हैं। मोटापे का माप हाईट के साथ वजन व कमर के माप से की जाती है।
मोटापे का मुख्य कारण – आप रोज जितनी कैलोरी भोजन के रूप में लेते हैं, आपका शरीर उतनी मात्रा में बर्न नहीं कर पाता है। इसके कारण अतिरिक्त कैलोरी फैट के रूप में जमा होने लगती है। मोटापेया वजन बढने का यह मुख्य कारण है। सामान्यतः पुरुषो में 2500 कैलोरी की आवश्यकता होती है, तो वही स्त्रीयों के लिए 2,000 कैलोरी पर्याप्त होती है। यदि आप वजन कम करने की दिली इच्छा है, तो 500 कैलोरी कम कसे की आदत डाले।
पिछले दिनों हमारे देश के प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी ने “मन की बात” में देश में तेजी से बढ़ रहे मोटापे का मुदॄदा उठाया था। उन्होने कहा अपने नियमित आहार में 10 प्रतिशत खाद्य तेल में कमी करो, उन्होंने इस संबंध में एक टीम का गठन भी किया।
वैसे भी बीते 10 वर्षों में भारत में मोटापा लगातार बढ़ा है। नेशनल फैमली हेल्थ सर्वे के अनुसार 2015-16 से 2019-21 की बीच मोटापे की दर मै बढ़ोतरी हुई , देखा जाय शहरी इलाकों में मोटापा ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में अधिक है। पुरुषों में 18.9 प्रतिशत से बढकर 22.9 प्रतिशत हो गया, वहीं स्त्रीयों में यह 20.6 प्रतिशत से बढ़कर 24 प्रतिशत हो गया । यही नहीं बच्चों में भी मोटापे की समस्या बहुत गंभीर रूप में देखी जा रही है। 5 साल से कम उम्र के बच्चों में अधिक वजन की दर 2.1 प्रतिशत से बढ़कर 3.4 प्रतिशत होगई। इस तरह सन् 1990 के बाद वयस्कों में मोटापे की दर दुगुनी और बच्चों में चौगुनी बढ़ी। आज 100 करोड़ से ज्यादा देशवासियों में मोटापा पनपा। सन् 2019 से मोटापे से 50 लाख मौते हो चुकी है। यह कुषोषण के होने वाली मौतों से 20 गुना ज्यादा है।
कुछ देशों ने बचपन से मोटापे पर लगाम लगाने की कोशिश की, जिसमें जापान काफी हद तक सफल रहा है। जापान में मोटापे के संबंध में स्पष्ट है। कि जापानी ताजा व स्वस्थ पारंपरिक खाना खाते हैं। इसमें सब्जियां चावल, व सोया उत्पादों के खाने में पर्याप्त मात्रा में लेते, जिससे कैलोरी कम रहती, पोषक तत्त्व ज्यादा होते है। खाने मे पर्याप्त मात्रा में सलाद भी लेते हैं, खाना थोडा- थोड़ा लेते । पैदल चलना व साइकिलिंग उनकी दिनचर्या का हिस्सा बना रहता है। वहाँ पर बच्चों के स्कूल बॉक्स में जंक फूड पर रोक लगी होने से पिछले तीन वर्षों में मोटे बच्चों की दर घट गई है।
मोटापा से ही दुर्लभ बीमारियों का प्रादुर्भाव हो रहा है। इसी मोटापे के कारण आज 80 करोड लोग दुर्लभ बीमारियों की चपेट में है। अभी भारत में अस्वास्थकर खान पान , शहरीकरण, और आधुनिक जीवन शैली, तनाव और नींद की कमी के साथ फास्टफूड, मिठाईयाँ, तली हुई चीजों का सेवन, अल्कोहल का सेवन, वसा का कम उपयो ग, शारीरिक गतिविधियों की कमी, व्यायाम या योग का अभाव कारणों से मोटापे में बढ़ोतरी हो रही है। एक सर्वे में 50 प्रतिशत से अधिक भारतीय शारीरिक रूप से सक्रिय नहीं है। वहीं’ वायु प्रदुषण भी मोटापे को बढावा दे रहा है । इन सभी विसंगतियों से आज 2025 में 10 करोड़ से ज्यादा भारतीय मधुमेह से पीड़ित भी है, जो विश्व में सबसे अधिक संख्या में है ।
प्राकृतिक चिकिस्सा से मोटापा कम करने के लिए संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और स्वस्थ जीवन शैली को अपनाने के साथ घरेलू उपचार की जाने की आवश्यकता है। मोटापा व्यक्ति नियामित वजन की जांच साथ शारीरिक जांचे करवाने से दुर्लभ बीमारियों से बचा सकेगा । डाक्टरी सलाह व संपर्क अवश्यक है न जाने कोन सी बीमारी पनपने लगे ।.
डॉ. बी० आर ० नलवाया, मंदसौर
9826769449.